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‘गो’ से रक्षित “गोरखनाथ”
एक महान योगी, संत, धर्मनेता, जिन्होंने अपनी शक्ति और शिक्षा से एक ऐसे समाज को बदला जो झूठ, आडंबर, ऊँच-नीच, व्यभिचारिता आदि विकृतियों से ग्रसित था। उनकी महानता, जिसे संपूर्ण भारत पूजता है। भारत की प्रत्येक भाषा में उनकी कहानियाँ मिलती हैं। आज भी देश के हर कोने में उनके अनेक अनुयायी पाए जाते हैं। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी कहते हैं – “शंकराचार्य के बाद इतना प्रभावशाली और इतना महिमामण्डित महापुरुष भारत में दूसरा नहीं हुआ।” मात्र वह ही नहीं उनका नाम भी उतना ही प्रभावशाली व वंदनीय है, ‘गोरक्षनाथ’। जहाँ ‘गो’ है, वहाँ दिव्यता है! महानता है! ‘गोरक्ष’ संस्कृत भाषा का एक यौगिक शब्द है, जो ‘गो’ (गाय)…


