ज़रूरी था ठहरना
क्या ज़रूरी था ठहरना?वहाँ, जहाँ कोई नहीं थाअकेले रास्ते पर नज़रें गढ़ाएजहाँ से किसी के आने कीउम्मीद लगाएकभी पलट कर, कभी दाएँ-बाएँपर कुछ नज़र न आएक्या ज़रूरी था ठहरना? एकाएक…
गुरु गोरखनाथ और हिंदी
नाथ पंथ के प्रवर्तक एवं हठयोग के उपदेशक, महायोगी, गुरु गोरखनाथ का अवतरण एक ऐसे काल में हुआ जब सामाजिक व्यवस्था डगमगाने लगी थी, यहाँ तक कि भारतीय संस्कृति के…
मीराबाई – अद्भुत कला की प्रतिमान
मीराबाई, १६वीं शताब्दी की महान संत और कवयित्री हैं। वह कृष्ण की अनन्य भक्त एवं उत्तर भारत की हिंदू परंपरा से संबंध रखती हैं, लेकिन उनकी कृष्ण भक्ति न केवल…
‘मुक्त’
कहा था,जब यह बारिश का कहर मुझ पर टूटे और मेरे पंख गिले हों जाएँ,बस कुछ क्षण के लिए साथ दे देना!परंतु, फिर से वही हुआ,भरती उड़ान में जाने कितने…
एकता की प्रतीक – हिंदी
“अरुण यह मधुमय देश हमारा। जहाँ पहुँच अंजान क्षितिज को मिलता एक सहारा।।” (जयशंकर प्रसाद) भारत में अंजान क्षितिज को भी सहारा मिल जाता है अर्थात भारत भूमि ने सभी को…
