‘मुक्त’
कहा था,जब यह बारिश का कहर मुझ पर टूटे और मेरे पंख गिले हों जाएँ,बस कुछ क्षण के लिए साथ दे देना!परंतु, फिर से वही हुआ,भरती उड़ान में जाने कितने…
शुद्ध हिंदी लेखन
हिंदी का प्रयोग-क्षेत्र विस्तृत है। हिंदी की 18 बोलियाँ व उनकी उपबोलियाँ और उनके भी स्थानीय रूप होने के कारण, भाषा में अनेक भिन्नताएँ दिखाई देती हैं, जिससे उसके लेखन-शैली…
देवनागरी लिपि तथा हिंदी वर्तनी का मानकीकरण
हिंदी भारतीय संघ तथा हिंदी-भाषी राज्यों की राजभाषा है। हिंदी भाषा की लिपि देवनागरी है। इसे नागरी लिपि भी कहते हैं। किसी भी भाषा के प्रचार-प्रसार को सरल बनाने के…
संत साहित्य की वर्तमान प्रासंगिकता (संत रामानन्द)
संत रामानन्द कहते हैं अति किसी की भी अच्छी नहीं होती, बदलाव संसार का नियम है…. ऐसे ही एक बदलाव की आवश्यकता थी समाज को जब जाति-पाँति, ऊंच-नीच, छुआ-छूत जैसी…
“गुरु न तजूँ हरि कूँ तजि डारूँ”
‘गुरु’ अर्थात् अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला। गुरु का अर्थ या उसकी परिभाषा शब्दों में व्यक्त करना असंभव है। किसी वस्तु या व्यक्ति का वर्णन किया जा…
