“गुरु न तजूँ हरि कूँ तजि डारूँ”
‘गुरु’ अर्थात् अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला। गुरु का अर्थ या उसकी परिभाषा शब्दों में व्यक्त करना असंभव है। किसी वस्तु या व्यक्ति का वर्णन किया जा…
महान संत-कवयित्री लल्लेश्वरी
कश्मीर की महान संत कवयित्री लल्लेश्वरी का जन्म सन् 1320-1392 माना जाता है। वे ललद्यद, लल, लल्ला, ललदेवी, लैला आदि नामों से प्रसिद्ध हैं। कश्मीरी साहित्य में इनकी रचनाएँ महत्वपूर्ण…
शुद्ध हिंदी लेखन
हिंदी का प्रयोग-क्षेत्र विस्तृत है। हिंदी की 18 बोलियाँ व उनकी उपबोलियाँ और उनके भी स्थानीय रूप होने के कारण, भाषा में अनेक भिन्नताएँ दिखाई देती हैं, जिससे उसके लेखन-शैली…
‘गो’ से रक्षित “गोरखनाथ”
एक महान योगी, संत, धर्मनेता, जिन्होंने अपनी शक्ति और शिक्षा से एक ऐसे समाज को बदला जो झूठ, आडंबर, ऊँच-नीच, व्यभिचारिता आदि विकृतियों से ग्रसित था। उनकी महानता, जिसे संपूर्ण…
‘गणपति कवच’
श्री गणेशाय नमःश्रीगणेश जी की परम इच्छानुसार संत सुंदर जी द्वारा रचित कल्याणकारी ‘गणपति कवच’ ‘गणपति कवच’ हे गजानन! आपका अभयहस्त, हमारी पूर्णतः रक्षा करे।हे गणपति! नागनासा, हमारे सभी भय,…
