ज़रूरी था ठहरना
क्या ज़रूरी था ठहरना?वहाँ, जहाँ कोई नहीं थाअकेले रास्ते पर नज़रें गढ़ाएजहाँ से किसी के आने कीउम्मीद लगाएकभी पलट कर, कभी दाएँ-बाएँपर कुछ नज़र न आएक्या ज़रूरी था ठहरना? एकाएक…
तुम शिव की शक्ति
हे नारी! तुम शिव की शक्ति इस धरा पर भक्ति ममता की मूरत प्रेम की सूरत जीवन दायिनी हो तुम ! हे नारी! भावों को समेटे धैर्य को लपेटे अँधेरे…
‘मुक्त’
कहा था,जब यह बारिश का कहर मुझ पर टूटे और मेरे पंख गिले हों जाएँ,बस कुछ क्षण के लिए साथ दे देना!परंतु, फिर से वही हुआ,भरती उड़ान में जाने कितने…
‘गोशाला’ से पवित्र स्थल, दुनिया में कहीं भी नहीं…
महर्षि वशिष्ठ जी ने कहा है – “गाव: स्वस्त्ययनं महत्” अर्थात् ‘गो मंगल का परम् निधान है।’ जहाँ गोमाता का पालन-पोषण भली-भाँति नहीं होता, वहाँ अमंगल दशा देखने को मिलती…
स्वीकृत शब्दावली निर्माण के सिद्धांत
1. अंतरराष्ट्रीय शब्दों को यथासंभव उनके प्रचलित अंग्रेजी रूपों में ही अपनाना चाहिए और हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओं की प्रकृति के अनुसार ही उनका लिप्यंतरण करना चाहिए। अंतर्राष्ट्रीय शब्दावली…
