• श्रेष्ठ कवियों की श्रेष्ठ कविताएँ

    प्यार की कहानी चाहिए
    कवि- गोपालदास “नीरज”

    आदमी को आदमी बनाने के लिएजिंदगी में प्यार की कहानी चाहिएऔर कहने के लिए कहानी प्यार कीस्याही नहीं, आँखों वाला पानी चाहिए। जो भी कुछ लुटा रहे हो तुम यहाँवो ही बस तुम्हारे साथ जाएगा,जो छुपाके रखा है तिजोरी मेंवो तो धन न कोई काम आएगा,सोने का ये रंग छूट जाना हैहर किसी का संग छूट जाना हैआखिरी सफर के इंतजाम के लिएजेब भी कफन में इक लगानी चाहिएआदमी को आदमी बनाने के लिएजिंदगी में प्यार की कहानी चाहिए। रागिनी है एक प्यार कीजिंदगी कि जिसका नाम हैगाके गर कटे तो है सुबहरोके गर कटे तो शाम हैशब्द और ज्ञान व्यर्थ हैपूजा-पाठ ध्यान व्यर्थ हैआँसुओं को गीतों में बदलने के…

  • लेख

    आत्मनिर्भर भारत

    सकारात्मक दृष्टि से आत्मनिर्भर होगा देश एक दृष्टि हम अपने प्राचीन भारत पर डालते हैं तो पातें हैं कि 2,500 ई.पू. ही हमारे भारत देश में कृषि, मिट्टी के बर्तन बनाने की कला, औजार, आभूषण, मानव निर्मित वस्तुओं तथा मिश्रित धातु की मूर्तियों के निर्माण का कौशल विस्तृत हो चुका था। शहरों का विकास, सिक्कों का इस्तेमाल, शास्त्रों की रचना, ज्ञान-विज्ञान, योग, आयुर्वेद, शल्य चिकित्सा जैसी अद्भुत क्रियाओं से समृद्ध भारत देश, प्रगति पथ पर बहुत आगे था। विदेशी आक्रमणों का सामना करते-करते देश विकास मार्ग में बाधित होता गया, बढ़ती जनसंख्या, अकाल तथा गरीबी के साथ-साथ अपना देश विदेशी शासकों द्वारा दमन और दरिद्रता का शिकार होता गया।स्वतंत्रता आंदोलन…

  • श्रेष्ठ कवियों की श्रेष्ठ कविताएँ

    आओ फिर से दिया जलाएँ – अटल बिहारी वाजपेयी

    आओ फिर से दिया जलाएँ।भरी दुपहरी में अँधियारासूरज परछाई से हाराअंतरतम का नेह निचोड़ें-बुझी हुई बाती सुलगाएँ।आओ फिर से दिया जलाएँ। हम पड़ाव को समझे मंज़िललक्ष्य हुआ आँखों से ओझलवर्त्तमान के मोहजाल में-आने वाला कल न भुलाएँ।आओ फिर से दिया जलाएँ। आहुति बाकी यज्ञ अधूराअपनों के विघ्नों ने घेराअंतिम जय का वज़्र बनाने-नव दधीचि हड्डियाँ गलाएँ।आओ फिर से दिया जलाएँ।

  • श्रेष्ठ कवियों की श्रेष्ठ कविताएँ

    एक वृक्ष की हत्या – कुँवर नारायण

    अबकी घर लौटा तो देखा वह नहीं था—वही बूढ़ा चौकीदार वृक्षजो हमेशा मिलता था घर के दरवाज़े पर तैनात। पुराने चमड़े का बना उसका शरीरवही सख़्त जानझुर्रियोंदार खुरदुरा तना मैला-कुचैला,राइफ़िल-सी एक सूखी डाल,एक पगड़ी फूल पत्तीदार,पाँवों में फटा-पुराना जूताचरमराता लेकिन अक्खड़ बल-बूता धूप में बारिश मेंगर्मी में सर्दी मेंहमेशा चौकन्नाअपनी ख़ाकी वर्दी में दूर से ही ललकारता, “कौन?”मैं जवाब देता, “दोस्त!”और पल भर को बैठ जाताउसकी ठंडी छाँव में दरअसल, शुरू से ही था हमारे अंदेशों मेंकहीं एक जानी दुश्मनकि घर को बचाना है लुटेरों सेशहर को बचाना है नादिरों सेदेश को बचाना है देश के दुश्मनों सेबचाना है—नदियों को नाला हो जाने सेहवा को धुआँ हो जाने सेखाने को…

  • श्रेष्ठ कवियों की श्रेष्ठ कविताएँ

    धीरे-धीरे
    – सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

    भरी हुई बोतलों के पासख़ाली गिलास-सामैं रख दिया गया हूँ। धीरे-धीरे अँधेरा आएगाऔर लड़खड़ाता हुआमेरे पास बैठ जाएगा।वह कुछ कहेगा नहींमुझे बार-बार भरेगाख़ाली करेगा,भरेगा—ख़ाली करेगा,और अंत मेंख़ाली बोतलों के पासख़ाली गिलास-साछोड़ जाएगा। मेरे दोस्तो!तुम मौत को नहीं पहचानतेचाहे वह आदमी की होया किसी देश कीचाहे वह समय की होया किसी वेश की।सब-कुछ धीरे-धीरे ही होता हैधीरे-धीरे ही बोतलें ख़ाली होती हैंगिलास भरता है,हाँ, धीरे-धीरे हीआत्मा ख़ाली होती हैआदमी मरता है। उस देश का मैं क्या करूँजो धीरे-धीरे लड़खड़ाता हुआमेरे पास बैठ गया है। मेरे दोस्तो!तुम मौत को नहीं पहचानतेधीरे-धीरे अँधेरे के पेट मेंसब समा जाता है,फिर कुछ बीतता नहींबीतने को कुछ रह भी नहीं जाताख़ाली बोतलों के पासख़ाली गिलास-सा सब…

  • श्रेष्ठ कवियों की श्रेष्ठ कविताएँ

    देश कागज पर बना नक्शा नहीं होता
    – सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

    यदि तुम्हारे घर केएक कमरे में आग लगी होतो क्या तुमदूसरे कमरे में सो सकते हो?यदि तुम्हारे घर के एक कमरे मेंलाशें सड़ रहीं होंतो क्या तुमदूसरे कमरे में प्रार्थना कर सकते हो?यदि हाँतो मुझे तुम सेकुछ नहीं कहना है। देश कागज पर बनानक्शा नहीं होताकि एक हिस्से के फट जाने परबाकी हिस्से उसी तरह साबुत बने रहेंऔर नदियां, पर्वत, शहर, गांववैसे ही अपनी-अपनी जगह दिखेंअनमने रहें।यदि तुम यह नहीं मानतेतो मुझे तुम्हारे साथनहीं रहना है। इस दुनिया में आदमी की जान से बड़ाकुछ भी नहीं हैन ईश्वरन ज्ञानन चुनावकागज पर लिखी कोई भी इबारतफाड़ी जा सकती हैऔर जमीन की सात परतों के भीतरगाड़ी जा सकती है। जो विवेकखड़ा हो…

  • मानक हिंदी

    अनुस्वार (ं) और चंद्र बिंदु (ँ) संबंधी अशुद्धियाँ

    अनुस्वार के स्थान पर चंद्रबिंदु लगाइए* अशुद्ध रूपअंगीठीअंगूठाअंग्रेजीआंसूकंटीलाकांटागांधीजाऊंगाजूंडांटढंगतांगातांबादांवपांचफांसीबांदामांरोटियांसांपहंसीहां-हूंहोउंगी शुद्ध रूप*अँगीठीअँगूठाअँग्रेजीआँसूकँटीलाकाँटा (कंटक सही है)गाँधी (गंदी सही है)जाऊँगाजूँडाँटढँगताँगाताँबादाँवपाँचफाँसीबाँदामाँरोटियाँसाँपहँसीहाँ-हूँहोउँगी * अनुस्वार के स्थान पर चंद्रबिंदु का प्रयोग करना पूर्णत: अशुद्ध है। चंद्रबिंदु (ँ) के स्थान पर अनुस्वार (ं) लगाइए अशुद्ध रूपअँकअँकुशअँजनएवँक्रमाँकदिनाँकपँचबाराबँकीरँगविशेषाँकसँस्कृतसँयोगस्वयँ शुद्ध रूपअंकअंकुशअंजनएवंक्रमांकदिनांकपंच ( पाँच सही है)बाराबंकीरंगविशेषांकसंस्कृतसंयोगस्वयं अनुस्वार न लगाइए अशुद्ध रूपजाएंगींओंठगेंहूँचाहिएंदोस्तों शुद्ध रूपजाएंगी*ओठगेहूँ चाहिए**दोस्तो*** (संबोधन में, जैसे-प्रिय दोस्तो!) अशुद्ध रूपनींबूनोंकपूछतांछबीचोंबीचभींगनामहीनेंमानोंहोंठो शुद्ध रूपनीबूनोकपूछताछबीचोबीचभीगनामहीनेमानोहोठों * भविष्यत् काल में बहुवचन में- गें, गीं नहीं होता। इनसे पूर्व का स्वर प्रभावित होता है, जैसे- जाएगी > जाएंगी > जाएंगे आदि।भूतकाल में स्त्रीलिंग में अनुस्वार लगता है, जैसे-आई > आईं ; लेकिन पुल्लिंग > बहुवचन में अनुस्वार नहीं लगता, जैसे आया > आए आदि । ** ‘मुझे…

  • लेख

    ‘गोशाला’ से पवित्र स्थल, दुनिया में कहीं भी नहीं…

    महर्षि वशिष्ठ जी ने कहा है – “गाव: स्वस्त्ययनं महत्” अर्थात् ‘गो मंगल का परम् निधान है।’ जहाँ गोमाता का पालन-पोषण भली-भाँति नहीं होता, वहाँ अमंगल दशा देखने को मिलती है और जहाँ गोमाता की पूजा होती है, वहाँ संपन्नता व आनंद की वर्षा होती है। यही कारण था कि पूर्वकाल में राजा गोधन को ही सर्वश्रेष्ठ मानते थे; गोपूजा, गोदान की प्रथा प्रचलित थी। समय के साथ भारतीय संस्कृति का सर्वश्रेष्ठ आचरण ‘गोसेवा’ लुप्त होती गई और जिस देश में दूध की नदियाँ बहती थीं, वहाँ गरीबी बढ़ती गई। भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आचार्य विनोबा भावे जी ने कहा है – “हिंदुस्तानी सभ्यता का नाम ही ‘गोसेवा’ है।”महानगर…

  • कविता

    पड़ाव

    एक बार कहा था मैंनेउस सितारे से एक दिन चमकूंगी तेरी तरहपर इतनी दूर नहीं जहाँतेरे टूटने की प्रतीक्षा मेंनज़रें गड़ाए ज़िंदगी बिता देते हैंतुझसे उम्मीद रखने वाले। ठहर जाऊँगी मैं उस पड़ाव पर हीजहाँ से देख सकूंगी उन चेहरों कोजो आस लगाए बैठे हैं औरटूट जाया करूँगी बार-बारउनके चेहरे पर मुस्कराहट लाने के लिए।

  • संस्मरण

    सब कुछ मिल गया

    शाम को जॉब से लौटते समय भाई ने फोन किया और कहा कि दीदी थोड़ा तैयार रहना, मेहमान आ रहे हैं। मैंने कई बार पूछा कि कौन आ रहे हैं? भाई बोला कि बहुत स्पेशल हैं। मैं बहुत उत्सुक थी कि कौन मेहमान आ रहे हैं, कोई उसके सीनियर ऑफिसर आ रहे हैं या कोई और….? इंतजार करते-करते काफी समय बीत गया। फिर फोन आया…. भाई – दीदी आप फर्स्ट फ्लोर से नीचे सड़क पर आ जाइए। मैंने कहा – इतने बड़े मेहमान हैं कि उनका स्वागत सड़क पर जाकर ही करना पड़ेगा।मैं और मेरे पति दोनों ही नीचे पहुँचे तो देखा कि वह बाइक पर अपने दोस्त के साथ…