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शुद्ध हिंदी लेखन
हिंदी का प्रयोग-क्षेत्र विस्तृत है। हिंदी की 18 बोलियाँ व उनकी उपबोलियाँ और उनके भी स्थानीय रूप होने के कारण, भाषा में अनेक भिन्नताएँ दिखाई देती हैं, जिससे उसके लेखन-शैली में विविधता आ जाती है। इस प्रकार, किसी वाक्य रचना या शब्दों का शुद्ध-अशुद्ध कहना कठिन हो जाता है, शब्दों के उच्चारण एवं लेखन में प्राय: एकरूपता का अभाव भी दिखाई देता है। अतः भाषा का मानक रूप, उसे पढ़ने, लिखने व समझने में एकरूपता के साथ सहजता प्रदान करता है एवं संप्रेषण को प्रभावी बनाता है। यहाँ, भाषा के शुद्ध व मानक रूप द्वारा हिंदी-लेखन में विभिन्न प्रकार की अशुद्धियों से परिचित कराया गया है। वर्तनी-संबंधी अशुद्धियाँ ‘अ’ के…
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युगदृष्टा स्वामी विवेकानंद
“जिस चरित्र में ज्ञान, भक्ति और योग – इन तीनों का सुंदर सम्मिश्रण है, वही सर्वोत्तम कोटि का है। एक पक्षी के उड़ने के लिए तीन अंगों की आवश्यकता होती है – दो पंख और पतवारस्वरूप एक पूँछ। ज्ञान एवं भक्ति मानो तो पंख है और योग पूँछ, जो सामंजस्य बनाए रखता है।” ऐसे दार्शनिक, विचारक, लेखक, वक्ता, देशभक्त, भक्त, मानव व प्रकृति प्रेमी युगदृष्टा स्वामी विवेकानंद, जिन्होंने मात्र 25 वर्ष की आयु में गृह त्याग दिया। वे सत्य की खोज में तब तक प्रयासरत रहे, जब तक उसे पा नहीं लिया।मात्र 30 वर्ष की आयु में शिकागो सम्मेलन में भारत देश की संस्कृति, सभ्यता अध्यात्म, धर्म को सम्मान दिलाया,…
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संत कवयित्री सहजोबाई
हिंदी साहित्य के भक्ति काल में यदि किसी संत कवयित्री की बात की जाए तो तुरंत ही मीराबाई का नाम जिह्वा पर होता है, परंतु यह भी विचारणीय है कि उनके अलावा किसी अन्य महिला संत का आविर्भाव नहीं हुआ। भक्त मीराबाई के समान चारों और भक्ति की सुगंध फैलाने वाली 18वीं सदी की सहजोबाई भी अविस्मरणीय स्थान रखती हैं।सहजोबाई का जन्म 25 जुलाई, सन् 1725 दिल्ली माना जाता है, वहीं, कहीं-कहीं 15 जुलाई, सन् 1724 का भी उल्लेख मिलता है। माना जाता है कि राजस्थान में उनका जन्म हुआ और बाद में, वे सपरिवार दिल्ली आ गईं। प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही हुई। शादी के समय एक ऐसी घटना…
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रिकॉर्डिंग
एक जमाना थाजब कह देते थे अपनीसुन लेते थे उनकीकर लेते थे दिल हल्काकुछ कहकर अपने मन की। अब सब यहाँ बदल गयामन की कहने से अंतर्मन सहम गयाविश्वास तमाशा बन गयारिकॉर्डिंग से वह छल गयासंबंध व्हाट्सएप में ढल गया।
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मीराबाई – अद्भुत कला की प्रतिमान
मीराबाई, १६वीं शताब्दी की महान संत और कवयित्री हैं। वह कृष्ण की अनन्य भक्त एवं उत्तर भारत की हिंदू परंपरा से संबंध रखती हैं, लेकिन उनकी कृष्ण भक्ति न केवल सम्पूर्ण भारत में अपितु दूसरे देश में भी जानी जाती है। मीराबाई का जन्म भारत के राजस्थान के पाली के कुंडकी जिले के एक राजपूत शाही परिवार में हुआ था। मीराबाई न केवल कृष्ण की भक्त हैं अपितु उनके द्वारा रचित काव्य उन्हें श्रेष्ठ कवयित्री के रूप में भी दर्शाता है। उनका व्यक्तित्व इस प्रकार निखर कर बाहर आया कि सभी के लिए प्रेरणादायी बन गया। मीराबाई और उनके जीवन की कहानियाँ विभिन्न प्रकार की कलाओं जैसे पेंटिंग, मूर्तिकला आदि…
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गुरु गोरखनाथ और हिंदी
नाथ पंथ के प्रवर्तक एवं हठयोग के उपदेशक, महायोगी, गुरु गोरखनाथ का अवतरण एक ऐसे काल में हुआ जब सामाजिक व्यवस्था डगमगाने लगी थी, यहाँ तक कि भारतीय संस्कृति के विनाशक लक्षण प्रत्यक्ष होने लगे थे। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने उन्हें अपने युग के सबसे महान धर्म नेता का स्थान दिया है, वे कहते हैं – “शंकराचार्य के बाद इतना प्रभावशाली और इतना महिमान्वित महापुरुष भारतवर्ष में दूसरा नहीं हुआ।” विभिन्न मतानुसार गुरु गोरखनाथ का आविर्भाव सातवीं शताब्दी से तेरहवीं शताब्दी तक माना गया है, वहीं डॉ पीतांबर बड़थ्वाल ने संवत १०५० के आसपास माना है। उनका कहना है – “निर्गुण शाखा वास्तव में योग का ही परिवर्तित रूप…
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एकता की प्रतीक – हिंदी
“अरुण यह मधुमय देश हमारा। जहाँ पहुँच अंजान क्षितिज को मिलता एक सहारा।।” (जयशंकर प्रसाद) भारत में अंजान क्षितिज को भी सहारा मिल जाता है अर्थात भारत भूमि ने सभी को अपनाया है। कोई भी धर्म हो या कोई भी भाषा, सभी को एक समान भाव से सम्मानित किया है। परंतु राष्ट्र की एकता -अखंडता को बनाए रखने के लिए ‘एक राष्ट्रभाषा’ का होना अत्यंत आवश्यक है। व्यक्ति को व्यक्ति से, व्यक्ति को राष्ट्र से और राष्ट्र को विश्व से जोड़ने वाली भारत की भाषा ‘हिंदी’ ही है। ‘हिंदी’ मात्र भाषा ही नहीं अपितु हृदय भावो को व्यक्त करने का अत्यंत सरल व सुभग माध्यम है । यह अक्षरों में लिपटी शब्दों…
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महान संत-कवयित्री लल्लेश्वरी
कश्मीर की महान संत कवयित्री लल्लेश्वरी का जन्म सन् 1320-1392 माना जाता है। वे ललद्यद, लल, लल्ला, ललदेवी, लैला आदि नामों से प्रसिद्ध हैं। कश्मीरी साहित्य में इनकी रचनाएँ महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं और उन्हें ‘लाल वाक्य’ के नाम से भी जाना जाता है। 12 वर्ष की आयु में बाल विवाह और ससुराल से मिली यातनाएँ, दुर्व्यवहार ने, उन्हें घर त्यागने पर विवश कर दिया। वे इस सांसारिक मोह का त्याग कर, ईश्वर मार्ग पर चल पड़ीं। मीरा की भाँति लोक-लाज को छोड़, योग-ध्यान और भक्ति में ऐसी लीन हुईं कि हर संप्रदाय-धर्म का व्यक्ति उन्हें पूजने लगा। जहाँ हिंदू उन्हें लल्लेश्वरी कहकर आदर करते, वहीं मुस्लिम ललारिफा नाम से…
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मेरी अविस्मरणीय यात्रा
‘जीवन का एक नया अध्याय’ यात्रा’ मात्र एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने का नाम नहीं है या नए स्थान पर घूमने और मन बहलाने का साधन मात्र भी नहीं है; ‘यात्रा’ एक नए स्थान से परिचित कराती है और सदैव के लिए नया संबंध स्थापित करती है; उस स्थान से जुड़ी प्रत्येक जानकारी के साथ हमारा ज्ञानवर्धन करती है; विचारों में परिवर्तन लाती है; एक नई दृष्टि देती है; इतना ही नहीं जीवन रूपी पुस्तक में एक नए अध्याय के रूप में जुड़ जाती है। यहाँ तक कि हम कह सकते हैं कि कभी-कभी ‘यात्रा’ जीवन को नयी अनुभूति के साथ परिवर्तित ही नहीं करती, अपितु जीवन का…
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स्वीकृत शब्दावली निर्माण के सिद्धांत
1. अंतरराष्ट्रीय शब्दों को यथासंभव उनके प्रचलित अंग्रेजी रूपों में ही अपनाना चाहिए और हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओं की प्रकृति के अनुसार ही उनका लिप्यंतरण करना चाहिए। अंतर्राष्ट्रीय शब्दावली के अंतर्गत निम्नलिखित उदाहरण दिए जा सकते हैं :(क) तत्व और योगिकों के नाम, जैसे – हाइड्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड, आदि।( ख) तौल और माप की इकाइयाँ और भौतिक परिमाण की इकाइयाँ, जैसे – डाइन, कैलोरी, ऐम्पियर, आदि।(ग) ऐसे शब्द जो व्यक्तियों के नाम पर बनाए गए हैं, जैसे – मार्क्सवाद (कार्ल मार्क्स), ब्रेल (ब्रेल), बायॅकाट (कैप्टन बायॅकाट), गिलोटिन (डाॅ. गिलोटिन), गेरीमैंडर (मि. गेरी), एम्पियर (मि. एम्पियर), फारेनहाइट तापक्रम (मि. फारेनहाइट) आदि।(घ) वनस्पति विज्ञान, प्राणी विज्ञान, भूविज्ञान आदि की द्विपदी नामावली।(ङ)…


















