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भारतीय संस्कृति की परंपरागत कला – कोलम (रंगोली)
संस्कृति व कला के लिए भारत का विश्व में शीर्षस्थ स्थान है और इसका एक उदाहरण तमिलनाडु की प्राचीन परंपरा ‘कोलम’ के रूप में देख सकते हैं जिसे रंगोली भी कहते हैंl कोलम, तमिलनाडु में महिलाएं प्रतिदिन अपने घर के सामने एवं पूजा गृह में बनाती हैंl रंगोली शब्द संस्कृत के ‘रंगावल्ली’ शब्द से उद्धृत हैl भिन्न-भिन्न राज्यों में इसे अलग -अलग नामों से जाना जाता है: तमिलनाडु में कोलम, महाराष्ट्र में रंगोली, कर्नाटक में रंगवल्ली, उत्तरांचल में ऐमण, आंध्र प्रदेश में मुग्गु, केरल में अत्तप्पू आदि l प्राचीन काल से ही लोगों का विश्वास था कि कलात्मक चित्र शुभ के प्रतीक व धन्य -धान्य के परिचायक होते हैंl कोलम…
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कक्षा में एक दिन
मीरा और उसकी सभी सहेलियां कक्षा में एक साथ बैठकर दोपहर का खाना खाते हैं। एक दिन अचानक किसी कारण मीरा स्कूल नहीं आ पाती। जब वह दूसरे दिन आती है तो खाने के समय में सब लोग रोज की तरह साथ रहते हैं लेकिन वह क्या देखती है कि उसकी एक सहेली दूर अलग बेंच पर खाना खोल कर बैठी है। उसे बहुत अजीब लगता है और वह उससे पूछती है, पार्वती क्या हुआ आज तुम अलग क्यों खाना खा रही ? वह कुछ जवाब नहीं देती। मीरा फिर से पूछती है लेकिन उसकी आंखें आंसू से भर जाती है और वह फिर से जवाब नहीं दे पाती। मीरा…
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आशीर्वाद
रात के लगभग एक बज रहे हैं… अचानक खाँसी शुरू हो जाती है और इतना जोर पकड़ती है कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही। बुढ़ापे की मार के साथ हाथ– पैरों ने भी काम करना छोड़ दिया है…..पास में रखे लौटे का पानी भी खत्म हो चुका है…. परेशान, व्याकुल, लाचार मां करें तो क्या करें….. तभी खाँसी की आवाज सुनकर बेटा जाग जाता है और जैसे ही कमरे से बाहर जाने के लिए पैर रखता है कि…. बहू; कहां जा रहे हो इतनी रात में? बेटा; मां को बहुत खाँसी हो रही है परेशान हैं, उनके पास जा रहा हूं। बहू; चुपचाप सो जाओ। बेटा; बहुत ज्यादा…
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प्रेममयी श्रृंगार करो
दिव्य ज्योति भर, नवभारत माँ का प्रेममयी श्रृंगार करो। भेद-भाव सब दूर करो, एकत्व शक्ति संचार करो।। बदलेगा मौसम हृदय का, प्रेममयी बरसातें होंगी, महकेगी बगिया फूलों की, भोंरो की गुंजारे होंगी। बीत चुके सत्तर बरस, अब तो आज़ादी का भान करो द्वेष-भाव सब दूर करो, एकत्व शक्ति संचार करो।। स्वर्ग भूमि बन जाएगी जब, जाति-पाँति सब मिट जाएगा, होगा अनोखा देश जहाँ का, जब ‘मैं’ शब्द मिट जाएगा। स्वयं शक्ति उद्गार करो, संत वाणी का अनुसार करो हीन-भाव सब दूर करो, एकत्व शक्ति संचार करो॥ रूप-रंग-भाषा अनेक, हैं भारत माँ के लाल सभी, आन पड़ी जब लालों ने, दे दी अपनी जान वहीं। उनको शत्-शत् प्रणाम करो, तुम मातृभक्ति…
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नारी- पुरुष समान हैं और भिन्न भी
नारी एक ऐसा रहस्य है जिसे सभी ने अपने- अपने दृष्टिकोण से जानने का प्रयास किया और उसे परिभाषित किया। यदि हम आज की बात करें तो हर कोई नारी उत्थान और उसकी समस्या पर चर्चा कर रहा है। कभी नारी की पारिवारिक स्थिति को बदलने और उसे परिवार, समाज मे सम्मान, उचित स्थान दिलाने तो कभी पुरुषों से तुलना करते हुए समानता के अधिकार की बात की जा रही है। नारी प्रारंभ से ही पुरुष के समान है। उसकी सहभागिता प्रत्येक स्थान पर उतनी ही है जितनी पुरुष की। यहां तक कि वेद-पुराणों और शास्त्रों में उसका स्थान सर्वोपरि बताया गया है। नारी को स्वर्ग से भी श्रेष्ठ स्थान…
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प्रेमचंद – साहित्य का सूरज यथार्थ का साथी
न अपने लिए लिखा न औरों के लिए, लिखा उस दिल के लिए जिसने दर्द को छुआ । किया संघर्ष उस मझधार में जहां अक्सर डूब जाती है नैया, विश्वास लगन ने मंजिल दी हौंसले थे खेवैया । दर्द को जाना था इसलिए पहचाना था, स्वयं को कलम का मजदूर बताकर बदला साहित्य का जमाना था । कुरीतियों का तिरस्कार किया स्वयं को आगे कर, बाल विधवा से पुनर्विवाह किया । सम्राट यूं ही नहीं बन गए, कितनी तपस्याएं की मुश्किलें उठाई, उलझनें सुलझाईं । देखो निर्मला को- जहां बेमेल विवाह दिखाया, वही कैसे उसने अपना उत्तरदायित्व निभाया । होरी को देखो- किसान का सच दिया, वही अपने मालिकों का…








