Pragya Sahitya Sadhana

"आ नो भद्रा: क्रतवो यंतु विश्वत:"

  • Home
  • Blog
  • Services
  • मेरा परिचय
  • उद्देश्य
  • Contact
  • Shri Tailang Hindi Vidya Samsthan (Regd.)
  • Home
  • Blog
  • Services
  • मेरा परिचय
  • उद्देश्य
  • Contact
  • Shri Tailang Hindi Vidya Samsthan (Regd.)
  • कविता (27)
  • दिव्य रहस्य (2)
  • भारत माँ के वीर सपूत (2)
  • मानक हिंदी (6)
  • मेरा दिव्य संसार (6)
  • मेरी दिव्य यात्रा (2)
  • यात्रा वृतांत (1)
  • लघु कथा (4)
  • लेख (15)
  • विविध (3)
  • श्रेष्ठ कवियों की श्रेष्ठ कविताएँ (8)
  • संस्मरण (1)
  • कविता

    दो शब्द नहीं…

    November 3, 2020 /

    read more
    poojaparashar 0 Comments

    You May Also Like

    संघर्ष ही शक्ति

    March 20, 2021

    बलिदानी शीश

    May 1, 2021

    अपने दम पर

    November 3, 2020
  • कविता

    सागर में लीन

    November 3, 2020 /

    read more
    poojaparashar 0 Comments

    You May Also Like

    प्रेम

    March 26, 2019

    रिकॉर्डिंग

    December 18, 2021

    तुम शिव की शक्ति

    March 9, 2025
  • लेख

    सुखी और संपन्न भारत की प्रतीक : गौ माता

    September 18, 2020 /

    तुल्यनामानि देयानी त्रीणि तुल्यफलानि च।सर्वकामफलानीह गाव: पृथ्वी सरस्वती।। (महाभारत, अनु. ६९/४) अर्थात गाय, भूमि और सरस्वती, तीनों नाम एक समान हैं। तीनों का दान करने से समान फल की प्राप्ति होती है। यह तीनों मनुष्य की संपूर्ण कामनाएं पूरा करती हैं। परंतु आज ये तीनों दान लगभग समाप्त हो चुके हैं। शायद यही कारण है कि आज काल के विकराल रूप की भयावह स्थिति में सभी कामनाएं विफल हो रही हैं। जिस गृह में गौ माता का वास है, वहां कोई भी विषाणु का प्रवेश नहीं हो सकता। गाय के आसपास का स्थान सदा शुद्ध रहता है। वहाँ, गौमूत्र और गोबर से उत्सर्जित गंध, आस-पास की जहरीली वायु को अवशोषित…

    read more
    poojaparashar 0 Comments

    You May Also Like

    ‘गोशाला’ से पवित्र स्थल, दुनिया में कहीं भी नहीं…

    May 28, 2022

    महान संत-कवयित्री लल्लेश्वरी

    October 26, 2021

    ‘गो’ से रक्षित “गोरखनाथ”

    June 9, 2025
  • कविता

    नाता

    May 30, 2020 /

    कहाँ किसका किससे क्या नाता है? एक आता और एक जाता है। बस एक तथ्य सत्य बताता है, हम सबको वो ‘एक’ ही बनाता है, इस नाते आपका और हमारा, बड़ा गहरा और दिव्य नाता है।

    read more
    poojaparashar 0 Comments

    You May Also Like

    पड़ाव

    March 30, 2022

    त्योहार अपनी मिट्टी का

    April 5, 2021

    रिकॉर्डिंग

    December 18, 2021
  • कविता

    जोड़

    May 30, 2020 /

    आज-कल सब कुछबिखरा-बिखरा नज़र आता है,‘जोड़’ तो बसदुगनी शक्ति को दर्शाता है।जुड़ते, जोड़ते यह शक्तियूँही बढ़ती रहे,यही भाव इस जग को                                     सुन्दर बनाता है।

    read more
    poojaparashar 0 Comments

    You May Also Like

    अपने दम पर

    November 3, 2020

    रिकॉर्डिंग

    December 18, 2021

    पड़ाव

    March 30, 2022
  • कविता

    नारी

    May 30, 2020 /

    रिश्ता है ना नाता हैफिर भी अपनाती हैएक बात पर वहअपने घर से दूसरे घर कीअपनी बन जाती हैहर रिश्ते को निभाती हैअपना सब भूल जाती हैऔर हम समझ ही नहीं पाते उसेजो स्वयं संसार को चलाती है….।

    read more
    poojaparashar 0 Comments

    You May Also Like

    प्रेम

    March 26, 2019

    पड़ाव

    March 30, 2022

    तुम शिव की शक्ति

    March 9, 2025
  • कविता

    *सत्य रूप छलता गया *

    November 29, 2019 /

    जब किया प्रवेश नव संसार में, शून्य थी विचार में, शांत थी स्वभाव में। खुले जो यह पटल, सब कुछ अनजान सा चौंधयायी मैं, पर कुछ था पहचान सा । स्पर्श जो हुआ, बदली फिर आकार में ध्वनियों ने ऐसे जगाया,खोई फिर से भाव में। वक्त रूप बदलता गया, मेरा भी रूप ढलता गया खोकर माया नगरी में , मेरा सत्य स्वरूप छलता ही गया।

    read more
    poojaparashar 0 Comments

    You May Also Like

    त्योहार अपनी मिट्टी का

    April 5, 2021

    संघर्ष ही शक्ति

    March 20, 2021

    बलिदानी शीश

    May 1, 2021
  • कविता

    दीप जला

    October 26, 2019 /

    ******************** कहाँ जलाऊं दीप, हर और उदासी छाई है। कहीं भ्रष्टाचार तो, कहीं गरीबी खाई है।। नफरत के अंगारों पर, कोई ना कोई जलता है। शोषण की इस अग्नि में, हर रोज कोई मरता है।। दीपक की ज्वाला भी, अब यह कहकर दहकती है- रख हौसला अपने दम पर, तूफानों से लड़ती हूं। सबको रोशन करती मैं, घनघोर अंधेरा हरती हूं।। स्वार्थ के बस में होकर तू, अपना अस्तित्व मिटाता है। भरा अंधेरा अंतर्मन में, किस भाव का दीप जलाता है? प्रेम हृदय में रख पहले, स्नेह भरा अब पर्व मना। सबकी रक्षा के प्रण हेतु, इस दीवाली दीप जला।। ********************

    read more
    poojaparashar 1 Comment

    You May Also Like

    अपने दम पर

    November 3, 2020

    बलिदानी शीश

    May 1, 2021

    संघर्ष ही शक्ति

    March 20, 2021
  • कविता

    ठहराव

    August 2, 2019 /

    कभी विचलन, कभी उथलापन, तलाश, एक ठहराव, शांत भांव …………….. । आंसमा की ओर झांकता, दूर वसुन्धरा को तांकता । भॅवर से उबरने की आस, न डूबने का आत्मविश्वास । वेग से आती वयार, ले जाती साथ, लौटाती खाली हाथ । गिरते – उठते तरंगों के पार, मानी अपनी हार । डूबी गहराई के जहन में, मुस्कुराई अब मन में, बाह्यी खोज भटकाव ! डूब स्वयं में, गहराई में ही ठहराव शांत सार ………………….. ।।

    read more
    poojaparashar 1 Comment

    You May Also Like

    तुम शिव की शक्ति

    March 9, 2025

    पड़ाव

    March 30, 2022

    त्योहार अपनी मिट्टी का

    April 5, 2021
  • कविता

    बदल जाने दो सब

    July 31, 2019 /

    अपनी वाही-वाही के लिए लड़ते हो, कभी झूठ, कभी दिखावा का चोला पहनते हो, तुम्हारा साक्षी तुम्हें कैसे माफ करता है, सत्य जानकर भी असत्य स्वीकार करते हो। थोड़ा इतिहास के पन्ने पलट लो, ऑखें खोलो स्मरण कुछ कर लों भूखे लड़े, प्यासे मरे, इस देश के लिए हॅसकर फॉसी चढ़े, क्या रिश्ता था हमसे वाह ! क्या रिश्ता था वतन से । दूसरों के लिए जिए, जीवन हमें बता अमर हुए। और हम जीकर भी रोज मरते हैं, स्वार्थ के कीचड़ से, स्वयं को बदरूप, बदरंग और दुर्गंध भरते है । मानवता अब तो जगाओ । कब तक मुखौटा पहनोगे अब तो उतारो, अपने सत् रूप को जानो, पहचानो…

    read more
    poojaparashar 0 Comments

    You May Also Like

    बलिदानी शीश

    May 1, 2021

    तुम शिव की शक्ति

    March 9, 2025

    त्योहार अपनी मिट्टी का

    April 5, 2021
 Older Posts
Newer Posts 

Categories

  • कविता
  • दिव्य रहस्य
  • भारत माँ के वीर सपूत
  • मानक हिंदी
  • मेरा दिव्य संसार
  • मेरी दिव्य यात्रा
  • यात्रा वृतांत
  • लघु कथा
  • लेख
  • विविध
  • श्रेष्ठ कवियों की श्रेष्ठ कविताएँ
  • संस्मरण

Recent Posts

  • ‘मुक्त’
  • पथ पर मेरा जीवन भर दो – सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
  • स्वाधीनता के अज्ञात वीर : ‘स्वयं’ के रक्षक
  • ‘गो’ से रक्षित “गोरखनाथ”
  • बनाया है मैंने ये घर – रामदरश मिश्र

Recent Comments

  1. Shiv Shankar Sharma on ज़रूरी था ठहरना
  2. Shiv Shankar Sharma on ज़रूरी था ठहरना
  3. Sanjeev M on मेरी अविस्मरणीय यात्रा
  4. Bhavani Mohan on मेरी अविस्मरणीय यात्रा
  5. Shankar Parashar on ‘नवरात्रि’ : शक्ति को जागृत करने का स्रोत

Archives

  • May 2026
  • October 2025
  • September 2025
  • June 2025
  • March 2025
  • December 2024
  • October 2024
  • March 2024
  • January 2024
  • October 2023
  • September 2023
  • August 2023
  • July 2023
  • May 2023
  • December 2022
  • November 2022
  • October 2022
  • September 2022
  • July 2022
  • May 2022
  • March 2022
  • February 2022
  • January 2022
  • December 2021
  • October 2021
  • September 2021
  • May 2021
  • April 2021
  • March 2021
  • November 2020
  • September 2020
  • May 2020
  • November 2019
  • October 2019
  • August 2019
  • July 2019
  • March 2019
  • February 2019
  • January 2019
Ashe Theme by WP Royal.