मेरा दिव्य संसार

सब कुछ छूट जाएगा

जब सोचोगे यह मेरा है
यह भ्रम तेरा टूट जाएगा,
जो कुछ अपना माना था
वह सब कुछ छूट जाएगा।
तन्हा खुद को पाओगे
जब जरूरत सबसे अधिक होगी,
हर बनने वाला खास तेरा
दूर-दूर नज़र न आएगा।
जब सोचोगे यह मेरा है
यह भ्रम तेरा टूट जाएगा…।

दुनिया का दस्तूर है यह
उगते सूरज को प्रणाम है
ढलते की परवाह है किसे
अब चैन से सोने की तलाश है
हर कोई अब तेरा अपना
कहीं और सपने सजाएगा
जब सोचोगे यह मेरा है
यह भ्रम तेरा टूट जाएगा…।

कृपा प्रभु की ऐसी बरसी
मायाजाल अब कट जाएगा
यह अंधकार जीवन में तेरे
नवचेतन को जगाएगा
ऐसा होगा सूर्योदय फिर
जीवन, चिर प्रकाश बन जाएगा।
जब सोचोगे यह मेरा है
यह भ्रम तेरा टूट जाएगा,
जो कुछ अपना माना था
वह सब कुछ छूट जाएगा।

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